Bhagwat Geeta, Chapter 1, Shlok 7

श्लोक: "दृष्टद्युम्नश्च शिखंडी च काशीराजश्च वीर्यवान्, पुरुजित् कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः।" अनुवाद (सरल शब्दों में): "महान योद्धा द्रष्टद्युम्न, शक्तिशाली शिखंडी, काशी के राजा, वीर्यवान, वीर पुरुजित, कुन्तिभोज और महान योद्धा शैब्य, ये सभी पांडवों की ओर से युद्ध करने के लिए यहां उपस्थित हैं।" इस श्लोक की कहानी: यह श्लोक भगवद गीता के पहले अध्याय का हिस्सा है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि पर खड़े हैं। यहां पांडवों और कौरवों के बीच महान युद्ध होने वाला है। अर्जुन, जो पांडवों का प्रमुख योद्धा है, युद्ध करने में संकोच कर रहा है। वह अपने रिश्तेदारों, मित्रों और गुरुओं के खिलाफ युद्ध करने की कल्पना से मानसिक रूप से उलझन में है। अर्जुन को समझाने के लिए भगवान श्री कृष्ण युद्ध की गंभीरता को बताते हैं और पांडवों के पक्ष में लड़ने वाले महान योद्धाओं के बारे में बताते हैं। इस श्लोक में भगवान कृष्ण पांडवों के पक्ष में लड़ने वाले शक्तिशाली योद्धाओं के नाम ले रहे हैं, ताकि अर्जुन को यह एहसास हो कि उसके साथ बहुत से वीर योद्धा हैं, जो धर्म के प...